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IMD Weather Update: देशभर में बारिश का कहर, गुजरात में बाढ़, MP में 28 जिलों में अलर्ट; जानिए अगले 48 घंटे का मौसम

IMD Weather Update: देशभर में भारी बारिश, बाढ़, लैंडस्लाइड और जलभराव की स्थिति को दर्शाती फीचर इमेज, जिसमें गुजरात, गुरुग्राम, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में मानसून का असर दिखाया गया है।

देशभर में मानसून अब अपने सबसे सक्रिय दौर में पहुंच चुका है। लगातार हो रही भारी बारिश ने कई राज्यों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है। गुजरात के सूरत में बाढ़ जैसे हालात हैं, हरियाणा के गुरुग्राम में हाईवे धंस गया है, जबकि मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड में भी तेज बारिश के कारण सड़कें बंद होने और नदियों के उफान पर आने की घटनाएं सामने आई हैं।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार अगले दो से चार दिनों तक उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखने की अपील की है।

गुजरात में बारिश बनी आफत, सूरत में 36 घंटे में 18 इंच पानी

गुजरात इस समय देश के सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल है। सूरत में केवल 36 घंटों के भीतर करीब 18 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई, जिससे शहर के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। कई स्थानों पर सड़कें नदी में बदल गईं और तेज बहाव में कारें बहती हुई दिखाई दीं।

प्रशासन ने एहतियात के तौर पर करीब 2100 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। वहीं सूरत और नवसारी में स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं। नागरिकों से केवल जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की गई है।

बारिश का असर रेलवे सेवाओं पर भी पड़ा है। सचिन और भेस्तान स्टेशन के बीच

गुरुग्राम में हाईवे धंसा, 10 किलोमीटर लंबा जाम

दिल्ली-एनसीआर में लगातार बारिश के कारण गुरुग्राम सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में शामिल रहा। दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) का एक हिस्सा धंस जाने से करीब 10 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया।

कई कॉलोनियों और मुख्य सड़कों पर दो-दो फीट तक पानी भर गया। सर्विस लेन के नाले में एक स्कूल बस भी फंस गई। स्थिति को देखते हुए गुरुग्राम पुलिस ने निजी कंपनियों से कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (WFH) की सुविधा देने की अपील की है, ताकि सड़क पर वाहनों का दबाव कम हो सके।

मध्य प्रदेश में चार दिन तक भारी बारिश का अलर्ट

मध्य प्रदेश में मानसून लगातार सक्रिय बना हुआ है। पन्ना, छतरपुर, खंडवा सहित कई जिलों में नदियां उफान पर हैं और कई ग्रामीण मार्गों पर आवागमन बाधित हो गया है।

मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले चार दिनों तक भारी से अति भारी बारिश हो सकती है। कई स्थानों पर 24 घंटे के भीतर 4 से 8 इंच तक वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

आज इंदौर, उज्जैन सहित 28 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने नदी-नालों के पास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

जबलपुर में पांच मंजिला इमारत गिरी

लगातार बारिश के बीच मध्य प्रदेश के जबलपुर से भी चिंताजनक खबर सामने आई है। शहर में मंगलवार शाम एक पांच मंजिला इमारत ढह गई। राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने का काम कर रहे हैं। प्रशासन ने आसपास के क्षेत्र को खाली करा दिया है।

राजस्थान में बारिश और बिजली गिरने से हादसे

राजस्थान में मानसून लगातार सक्रिय बना हुआ है। अजमेर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और बूंदी सहित कई जिलों में 1 से 3 इंच तक बारिश दर्ज की गई।

दूसरी ओर जालोर जिले में एक जीप नदी में पलट गई, जबकि चित्तौड़गढ़ में आकाशीय बिजली गिरने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।

उत्तराखंड में 32 सड़कें बंद, गंगोत्री हाईवे प्रभावित

उत्तराखंड में लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। गंगोत्री हाईवे पर मलबा गिरने से यातायात रोकना पड़ा है।

पूरे राज्य में फिलहाल 32 सड़कें बंद हैं, जिन्हें खोलने का कार्य जारी है। मौसम विभाग ने सभी जिलों में बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 13 जुलाई तक मौसम इसी तरह बना रह सकता है।

महाराष्ट्र में रेल और सड़क यातायात प्रभावित

महाराष्ट्र के नाला सोपारा रेलवे स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण जलभराव हो गया। स्टेशन परिसर और मुख्य सड़कों पर पानी भरने से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मुंबई में भी लगातार बारिश जारी है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है। कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

दिल्ली और मुंबई की उड़ानों पर भी असर

लगातार बारिश का असर अब हवाई सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। दिल्ली और मुंबई से आने-जाने वाली कई उड़ानों में देरी दर्ज की गई है।

इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट ने यात्रियों से अपील की है कि एयरपोर्ट रवाना होने से पहले अपनी फ्लाइट का ताजा स्टेटस अवश्य जांच लें और पर्याप्त समय लेकर घर से निकलें।

अरुणाचल प्रदेश में 94 हजार से अधिक लोग प्रभावित

पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का असर गंभीर बना हुआ है। अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन के कारण 26 जिलों के 94 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।

अब तक चार लोगों की मौत, 21 लोगों के घायल होने तथा दो महिलाओं के लापता होने की जानकारी सामने आई है। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है।

क्या जलवायु परिवर्तन बदल रहा है मानसून का स्वरूप?

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अल नीनो जैसी वैश्विक मौसमी परिस्थितियों के कारण भारत में मानसून का पैटर्न तेजी से बदल रहा है।

पहले जहां बारिश लंबे समय तक धीरे-धीरे होती थी, वहीं अब कम समय में अत्यधिक वर्षा होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। यही कारण है कि कई शहरों में कुछ ही घंटों की बारिश बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में इस तरह की अत्यधिक वर्षा और शहरी जलभराव की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। इसलिए शहरों की जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करना और मौसम पूर्व चेतावनी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना आवश्यक होगा।

क्या जलवायु परिवर्तन बदल रहा है मानसून का स्वरूप?

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अल नीनो जैसी वैश्विक मौसमी परिस्थितियों के कारण भारत में मानसून का पैटर्न तेजी से बदल रहा है।

पहले जहां बारिश लंबे समय तक धीरे-धीरे होती थी, वहीं अब कम समय में अत्यधिक वर्षा होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। यही कारण है कि कई शहरों में कुछ ही घंटों की बारिश बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में इस तरह की अत्यधिक वर्षा और शहरी जलभराव की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। इसलिए शहरों की जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करना और मौसम पूर्व चेतावनी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना आवश्यक होगा।

अगले दो दिनों का मौसम पूर्वानुमान

9 जुलाई

  • उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
  • पश्चिम बंगाल के 2 जिलों में रेड अलर्ट और 3 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी है।
  • ओडिशा के 5 जिलों में रेड अलर्ट तथा 8 जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है।

10 जुलाई

  • आंध्र प्रदेश, झारखंड और ओडिशा में भारी बारिश की संभावना है।
  • असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कई हिस्सों में तेज बारिश जारी रह सकती है।
  • गोवा, सिक्किम, तेलंगाना और कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में ऑरेंज अलर्ट प्रभावी रहेगा।

See alo: मौसम पूर्वानुमान

किसानों और यात्रियों के लिए जरूरी सलाह

लगातार बदलते मौसम को देखते हुए किसानों को खेतों में जल निकासी की व्यवस्था बनाए रखने और मौसम पूर्वानुमान देखकर ही बुवाई, खाद या कीटनाशक का छिड़काव करने की सलाह दी जा रही है।

वहीं यात्रा करने वाले लोगों को सड़क, रेल और हवाई सेवाओं का अपडेट पहले से जांच लेना चाहिए। यदि आपके क्षेत्र में रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी है, तो अनावश्यक यात्रा से बचना ही सुरक्षित रहेगा।

निष्कर्ष

देशभर में मानसून का असर अब और व्यापक होता जा रहा है। गुजरात में बाढ़, गुरुग्राम में हाईवे धंसने, मध्य प्रदेश में भारी बारिश, उत्तराखंड में भूस्खलन और महाराष्ट्र में जलभराव जैसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि आने वाले कुछ दिन चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

मौसम विभाग के अलर्ट पर नजर रखना, प्रशासन की सलाह का पालन करना और समय रहते आवश्यक सावधानी बरतना ही इस मानसूनी मौसम में सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी तरीका है।

FAQs (Frequently Asked Questions)

IMD ने किन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है?

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, सिक्किम, तेलंगाना और कर्नाटक के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। कुछ क्षेत्रों में रेड और ऑरेंज अलर्ट भी लागू है।

भारी बारिश के दौरान लोगों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

बारिश के दौरान जलभराव वाली सड़कों, नदी-नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहें। यात्रा पर निकलने से पहले मौसम और ट्रैफिक अपडेट जरूर देखें। बिजली गिरने की चेतावनी होने पर खुले मैदान या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।

क्या लगातार बारिश से ट्रेन और फ्लाइट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं?

हाँ। भारी बारिश और जलभराव के कारण कई राज्यों में ट्रेनें रद्द या डायवर्ट की जा सकती हैं। वहीं दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में उड़ानों में देरी या बदलाव भी संभव है। इसलिए यात्रा से पहले एयरलाइन या रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर स्टेटस अवश्य जांच लें।

किसानों को मानसून के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

किसानों को मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार ही बुवाई, सिंचाई, खाद और कीटनाशक का उपयोग करना चाहिए। खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें ताकि अत्यधिक बारिश से फसलों को नुकसान न पहुंचे।

जलवायु परिवर्तन का मानसून पर क्या असर पड़ रहा है?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन और अल नीनो जैसी वैश्विक मौसमी परिस्थितियों के कारण मानसून का स्वरूप बदल रहा है। अब कम समय में अत्यधिक बारिश, शहरी जलभराव और बाढ़ जैसी घटनाएं पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रही हैं, जिससे मौसम का पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन दोनों अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।

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