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PM मोदी ने मैसूरु में वाल्मीकि रामायण के कन्नड़ अनुवाद का किया विमोचन, युवाओं को भारतीय संस्कृति से जुड़ने का दिया संदेश

मैसूरु में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाल्मीकि रामायण और वेदांत साहित्य के कन्नड़ अनुवाद का विमोचन किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कर्नाटक के मैसूरु में भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की। उन्होंने वाल्मीकि रामायण और Stories of Vedanta Monks के कन्नड़ अनुवाद का विमोचन किया। यह कार्यक्रम रामकृष्ण आश्रम द्वारा निर्मित स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र (विवेक स्मारक) के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को मातृभाषाओं में उपलब्ध कराना न केवल सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का माध्यम है, बल्कि युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी प्रभावी तरीका है।

मातृभाषा में उपलब्ध होगा भारतीय आध्यात्मिक साहित्य

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वाल्मीकि रामायण और वेदांत से जुड़े साहित्य का कन्नड़ अनुवाद कर्नाटक के पाठकों, विशेषकर युवाओं, को भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और साहित्यिक विरासत के और अधिक करीब लाएगा। उन्होंने इस पहल को भारतीय भाषाओं के सम्मान और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि जब ज्ञान मातृभाषा में उपलब्ध होता है, तब उसे समझना और जीवन में अपनाना अधिक सहज हो जाता है।

रामकृष्ण आश्रम के कार्यों की प्रधानमंत्री ने की सराहना

कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने रामकृष्ण आश्रम का दौरा किया और वहां के संन्यासियों से मुलाकात की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी यात्रा की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि मैसूरु स्थित श्री रामकृष्ण आश्रम समाज सेवा और युवाओं को सशक्त बनाने का सराहनीय कार्य कर रहा है।

उन्होंने आश्रम की शिक्षा, नैतिक मूल्यों और युवा सशक्तिकरण के क्षेत्र में निरंतर सेवाओं की प्रशंसा की और कहा कि स्वामी विवेकानंद तथा श्री रामकृष्ण के विचार आज भी समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं।

विवेक स्मारक को बताया युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र

इस अवसर पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद तेजस्वी सूर्या ने विवेक स्मारक के उद्घाटन को कर्नाटक के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह स्मारक केवल एक भवन नहीं, बल्कि स्वामी विवेकानंद के विचारों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने वाला प्रेरणा केंद्र बनेगा।

तेजस्वी सूर्या ने स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध संदेश “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्मारक देशभर के युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करेगा।

स्वामी विवेकानंद की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 1892 में स्वामी विवेकानंद की मैसूरु यात्रा भारतीय आध्यात्मिक इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय रही है। ऐसे में उसी ऐतिहासिक शहर में विवेक स्मारक का निर्माण उनकी विरासत को नई ऊर्जा देने वाला कदम माना जा रहा है।

वक्ताओं के अनुसार, यह केंद्र युवाओं में चरित्र निर्माण, नेतृत्व क्षमता, शिक्षा और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने के उद्देश्य से कार्य करेगा।

भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर सरकार का लगातार जोर

हाल के वर्षों में केंद्र सरकार भारतीय भाषाओं में शिक्षा, साहित्य और डिजिटल सामग्री को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) में भी मातृभाषा आधारित शिक्षा और भारतीय भाषाओं में ज्ञान उपलब्ध कराने पर बल दिया गया है। इसी दिशा में विभिन्न भारतीय ग्रंथों और आध्यात्मिक साहित्य के क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय ज्ञान परंपरा अधिक लोगों तक पहुंचेगी और युवाओं में अपनी संस्कृति के प्रति जुड़ाव भी मजबूत होगा।

निष्कर्ष

मैसूरु में वाल्मीकि रामायण के कन्नड़ अनुवाद का विमोचन केवल एक पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और मातृभाषा के महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर यह संदेश भी दिया कि भारत की सांस्कृतिक विरासत तभी सशक्त होगी, जब वह लोगों तक उनकी अपनी भाषा में पहुंचे और समाज के हर वर्ग को उससे जुड़ने का अवसर मिले।

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